बड़े भाई ने 13 वर्ष पहले देखा था IAS बनने का सपना, छोटे भाई ने प्रथम प्रयास में क्रैक किया UPSC, पाया 213वां रैंक
अपने प्रथम प्रयास में मोतिहारी के अर्णव ने UPSC में पाया 213वां रैंक
मोतिहारी। कौन कहता है आसमान में सुराग नहीं हो सकता एक पत्थर तो तबीयत से उछालो यारो। कुछ ऐसा ही मोतिहारी के गांधी नगर रमणा मोहल्ला के रहने वाले अर्णव आनंद गुप्ता ने कर दिखाया है। इन्होंने अपने प्रथम प्रयास में ही 213 रैंक प्राप्त करके परिवार ही नहीं बल्कि पूरे देश में बिहार का गौरव बढ़ाया है.
चार भाई बहनों में सबसे छोटे हैं अर्णव
अर्णव के पिताजी बैद्यनाथ प्रसाद, कुशल बिजनेसमैन तो माता राजकुमारी देवी कुशल ग्रहणी है. बड़े भाई गुड्डू कुमार सेंट्रल बैंक ऑफ़ इंडिया, मुजफ्फरपुर में बैंक मैनेजर है, वही मझले भाई बिट्टू कुमार बिजनेस मैन तो बहन कुशल ग्रहणी व बहनोई शिक्षक है. अर्णव सभी भाई बहनों में सबसे छोटे एवं परिवार में सबके दुलारे हैं.
21 वर्ष की उम्र में रच दिया इतिहास
जहां 21 वर्ष की उम्र में युवा खेलकूद सोशल मीडिया में व्यस्त रहते हैं और फिर करियर के बारे में सोचना शुरु करते है तो वही अर्णव ने अपने प्रथम प्रयास में ही 213 रैंक लाकर इतिहास रच दिया। इतनी कम उम्र में इस रैंक तक पहुंच कर उन्होंने साबित कर दिया की प्रतिभा उम्र की मोहताज नहीं है.
हिंदू कॉलेज दिल्ली से पॉलिटिकल साइंस में ग्रेजुएशन
अर्णव, बचपन से ही पढ़ाई-लिखाई में काफी होनहार विद्यार्थी रहे हैं. उनकी प्रारंभिक शिक्षा-दीक्षा जवाहर नवोदय विद्यालय पिपरा कोठी से हुई है जहां उन्होंने 10th तक की पढ़ाई 95.8% है. इसके साथ ही स्कूल टॉपर रहे हैं. वही 12th एमएस मेमोरियल मोतिहारी से आर्ट्स विषय से किया है। जिसमें 98 प्रतिशत नंबर के साथ जिला टॉपर रहे हैं. इतना ही नहीं उन्होंने दिल्ली यूनिवर्सिटी के प्रतिष्ठित हिंदू कॉलेज से पॉलिटिकल साइंस में ग्रेजुएशन वर्ष 2023 में कंप्लीट किया है.
बड़े भैया का सपना एवं अपने इंटरेस्ट के लिए चुना IAS
अर्णव बताते हैं कि पब्लिक पॉलिसी में मेरा रुझान रहा है वही मेरे बड़े भैया आईएएस बनना चाहते थे किसके लिए 2012 में वह दिल्ली तैयारी करने के लिए गए थे लेकिन परिस्थितियों अनुकूल नहीं थी जिस कारण से वह लौट गए. मैंने उनके सपने को पूरा करने का संकल्प लिया. और अपने प्रथम प्रयास में ही मैंने उनके सपने को पूरा कर दिया.
बड़े भैया ही मेरे मोटिवेशन है
अर्णव बताते हैं की तैयारी के दौरान जब भी डिमोटिवेशन आया मैंने अपने बड़े भैया को याद किया. मेरे बड़े भैया ही मेरा सबसे बड़ा मोटिवेशन है. अब तक हमेशा से उनका मोटिवेशन मिलता रहा है इस कारण में इस मुकाम पर पहुंच पाया हूं.
IAS बनना है सपना तो फाउंडेशन पर करे काम
अर्णव बताते हैं कि चुकी पब्लिक पॉलिसी में मेरा शुरू से ही इंटरेस्ट रहा है इसलिए मैंने अपने ग्रेजुएशन के दौरान ही राजनीति विज्ञान और अंतराष्ट्रीय मामलों की पढ़ाई करी। बताते हैं कि फाउंडेशन (10th, 12th) के दौरान लिखने व बोलने पर काम करना चाहिए .
NCERT किताबों का गहनता से करें अध्ययन
IAS की तैयारी में सबसे अहम किताब एनसीईआरटी ही है. इन किताबों का गहन अध्ययन किया इसके साथ-साथ सिलेबस से जुड़ी हुई सभी बिंदुओं पर गहराई से काम किया.
युवा साथियों के लिए अर्णव का संदेश
अपने युवा साथियों को संदेश देते हुए अर्णव कहते हैं कि सबसे पहले आपको यह तय करना है कि आप यहां क्यों आना चाहते हैं. यदि आप सामाजिक क्षेत्रों में काम करना चाहते हैं या लीडरशिप की औपरचुनौटी बढ़ाना चाहते हैं तभी यहां आईए.
सेंट्रल बैंक ऑफ़ इंडिया के मैनेजर व अर्णव के बड़े भैया गुड्डू कुमार ने बताया कि उनका व हम सभी चाहते थे कि वह IAS ही बने और इस दिशा में वह काफी दिनों से प्रयास भी कर रहा था. यह उसका प्रथम प्रयास था। वे बताते हैं कि घर परिवार में उत्साह का माहौल है पिताजी और माताजी काफी खुश हैं.